गला
मानव व अन्य जीवों के गर्दन के आगे के हिस्से को गला कहते है. गले में मुह से आने वाली हवा कंठ से टकराती है और ध्वनि उत्पन्न करती है. ध्वनि उत्पन्न करने के लिए गले में स्वर-रज्जू होती है. मानव के गले में कई अंग होते है जैसे:
- श्वासनाली (trachea)
- स्वरग्रंथि (larynx)
- ग्रासनली(esophagus)
- कंठक(epiglottis)
वह नली जो मनुष्य और अन्य जीवों के गले में स्थित लैरिस्क को फेफड़े से जोड़ता है और फेफड़े तक हवा पहुचता है,
श्वासनाली (trachea) कहलाता है.
श्वासनाली (trachea) कहलाता है.
स्वरग्रंथि (larynx)
मनुष्यों और अन्य जीवों के गले में एक श्वसन अंग होती है. इस श्वसन अंग में बहुत सरे स्वर-रज्जू होते है.जब इन स्वर-रज्जू में हवा तेजी से आने लगती है तो अलग-अलग स्वर उत्पन्न करता है. यही स्वर हमें शब्दों में सुनाई देता है.
ग्रासनली(esophagus)
ग्रासनली लगभग 25 CM लम्बी एक पेशीय नाली है जो मुह के पीछे से शुरू होती है और श्वास नाली व ह्रदय से होते हुए अमाशय के आरंभ में मिलती है. हम मुह के माध्यम से जो भी खाते है वह महज 15 sec में अमाशय तक पहुच जाति है.
कंठक जहा आवाज उत्पन्न होती है जहा हवा टकराती है कंठक कहलाती है.
गला बैठने के लक्षण,कारण,इलाज
गला बैठना एक आम समस्या है इसमें आवाज सामन्य से थोड़ी बदल जाती है. सही से बोलने में तकलीफ होती है. गले में दर्द होने लगता है.गला बैठने का मुख्य कारण अधिक आवाज में चिलाने पर या जुखाम या संक्रमण के कारण हो सकता है.गला बैठने से कई प्रकार के बदलाव हो सकते है जैसे : आवाज मोटी,पतली,कम हो सकती है. इसके इलाज के रूप में आप गर्म पानी पिए व कुल्ला करें धुम्रपान से बचे और जादा बात ना करें अपनी आवाज को शांत रख, गले को आराम दें.
गला बैठने के लक्षण
गला बैठने के निम्न लक्षण है जो इस प्रकार है :
- निगलने में परेशानी,
- बोल नही पाना
- आवाज का भारी होना,
- गले में कुछ फसने का अहसास होना,
- खासी होना,बलगम आना
- सास लेने में दिकत आना
- बोलते बोलते आवाज कम हो जाना
- कुछ बोलने पर दर्द होना,
गला बैठने के कारण
- सर्दी होना
- जादा ठंडा वास्तु का सेवन करने पर
- संक्रमण
- धुम्रपान
- तेज आवाज में चिलाने के कारण
- एसिडिटी
- गले में सुजन होने पर
- गले का कैंसर होने पर,
- बार बार खासने पर
- श्वास नली में कुछ फस जाने पर,
गले का बचाव
आपको कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए :
- रात का खाना समय पर खाए ताकि आपका पाचन सही तरीके से हो पाए.
- धुम्रपान ना करें धुम्रपान करने से गले में ख़राब हवा भरने के कारण आवाज बैठ जाता है.
- अधिक तेज आवाज में बात या ना चिलाये.
- किसी प्रकार की एलर्जी होने पर डॉक्टर से इलाज कराये.
- गर्म पानी का सेवन व कुल्ला करें.
आपको गले में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए .सामान्य परेशानी होने पर आप घर में भी इसका इलाज कर सकते है.
घरेलु उपाय :
- गर्म पानी से गले की सेकाइ करें व पिए
- अदरक को भूंज कर खाए
- गर्म खाना का सेवन
- काली मिर्च,लौंग का सेवन
- काड़ा बना कर पिए
- शहद से भी गले को आराम मिलता है.
सलाह:
ये आपको सामन्य परेशानी में ही इसका फ़ायदा हो सकता है जैसे सर्दी या ठंडे वस्तु का उपयोग करने पर हुए खरास में,अत्यधिक परेशानी होने पर डॉक्टर के पास जा कर उचित उपचार करांए .

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