दांत
दांत मुह में स्थित जबड़ो पर होती है .यह सफ़ेद रंग का कठोर व अलग-अलग घनत्व के उतकों से मिलकर बने होते है.इसका मुख्य कार्य भोजन को चबाने,चीरने के काम आते है कुछ पशु इससे अपनी सुरक्षा व शिकार के लिया भी करते है. उ.दा.-शेर,कुत्ता अदि . यह सफ़ेद रंग की कठोर अंग है किन्तु यह हड्डी नही होती है. यह मानव के मुह को सुन्दर बनाने में भी सहायक होती है. दांत टूट जाने पर अपने रूप को अच्छा बाबाने के लिए नकली दांत का भी उपयोग करते है.
दांत की संरचना :
दांत दो प्रकार की होती है. मसूड़े के बाहर रहनेवाला भाग दंतशिखर कहलाता है और जबड़े के सुरुवात में स्थित, अन्दर में उपस्थित अंश को दंतमूल कहते हैं. शिखर और दंतमूल के मिलने वाले स्थान को दंतग्रीवा कहते है. दाँत का मुख्य भाग दंतास्थित है. दंतास्थि ,एक एनैमल नामक अत्यंत कड़े पदार्थ से ढकी रहती है. दंतमूल में दंतास्थित का आवरण सीमेंट करती है. सीमेंट और जबड़े की हड्डी को बीच दंतपर्यास्थित होती है, जो दाँत को बाँधती भी है और अन्दर में दाँत के लिये गद्दी की तरह काम करती है. दंतास्थि के अंदर दंतमज्जा होती है, जो उस खोखले हिस्से में रहती है जिसे दंतमज्जागुहा कहते हैं. इस गुहा में रुधिर और लसिकावाहिकाएँ तथा तंत्रिकाएँ होती हैं. ये दंतमूल के छोर पर स्थित एक छोटे से छिद्र से दाँत में प्रवेश करती हैं. दाँत एक जीवित वस्तु है,इसलिए इसे पोषण और चेतना की आवश्यकता होती है. एनैमल दाँत का सबसे कठोर और ठोस भाग है यह दंतशिखर को ढकता है. चर्वणतल पर इसकी परत सबसे मोटी और ग्रीवा के निकट पतली होती है. एनैमल की रचना षट्कोण प्रिज़्मों से होती है, जो दंतास्थि से समकोण पर स्थित होती हैं. एनैमल में चूने के फॉस्फेट, कार्बोनेट, मैग्नीशियम फास्फेट तथा अल्प मात्रा में कैलिसयम क्लोराइड पाए जाते हैं. दंतास्थित में घना एकरूप आधारद्रव्य, मेट्रिक्स और उसमें लहरदार तथा शाखाविन्याससंयुक्त दंत नलिकाएँ होती हैं, जो एक दूसरे से समानांतर होती हैं और अंदर की ओर दंतमज्जागुहा में खुलती हैं. दंतगुहा में जेली सी मज्जा भरी होती है. इसमें ढीला संयोजक ऊतक होता है, जिसमें रक्तवाहिका और तंत्रिकाएँ होती हैं.
दांत के प्रकार :
मानव के जीवन में दो बार और दो प्रकार के दांत आते है, दूध के दांत और स्थाई दांत. स्थाई दांत चार व दूध दांत तीन प्रकार के होते है. जिनके नाम इस प्रकार है -
- incisor(छेदक)- काटने वाले दांत होते है
- Canine (भेदक)- फाड़ने वाले दांत होते है.
- premolar(अग्रचर्वणक)- दबाने वाले दांत
- molar(चर्वणक)- चबाने वाले दांत होते है.
दांत का विकास क्रम जटिल होता है जिससे दांत का निर्माण होता है,यूज़ दातविकास प्रक्रिया कहा जाता है.
यह प्रक्रिया मानव के गर्भस्त जीवन के छ: महीने से शुरु हो जाता है इसमें मांस के चाप बनने लगते है,जिसके अन्दर दंत खुड बनते है. खुड के बाहर की उपकला ओठ और भीतर के दंताकुर बनाती है.दूध के दांत दूध के दांत 6 माह से 24 माह तक पुरे आ जाते है . छठवे वर्ष के बाद दूध के दांत गिरने लगते है.और उसकी जगह स्थाई दांत ले लेते है.स्थाई दांत जन्म से लेकर 17 वे वर्ष तक सारे दांत आ जाते है. स्थाई दांत एक बार टूट जाने पर दुबारा नही आते है. इसकी जगह आपको नकली दांत लगाना पड़ेगा.
- रोज सुबह जल्दी उठ कर दातुन या ब्रश से सफाई करें.
- रात में खाना खाने के बाद कुला या ब्रश कर सोना चाहिए.
- दांतों की मालिश करनी चाहिए
- कैविटी जमने वाली पदार्थो को खाने से बचे.
- मीठा कम खाए अगर खाते है तो खाने के बाद कुल्ला करें.
- दांत के डॉक्टर के पास नियमित चेकअप कराये.
- अपने खानपान पर ध्यान दे विटामिन a ,c ,d वाले खद्य पदार्थ खाए.
- दाँत खोखले हो जाना - दांत में खोखले हो जाने पर उसमे पानी और खाने के कुछ अंश रह जाते है, जो सड़ने लगते है और दांतों को नुकसान करने लगता है .
- दांत ढीले हो जाना -दांत ढीले होने का कारण मसूड़ो की बीमारी होती है. इसका कारण तम्बाकू चबाना,बढती उम्र हो सकता है.
- दांतों की असामन्य आकार- गिरने से दांतों में लगे चोट के कारण भी दांत टेड़े हो सकते है. इसके साथ ही यह अनुवांशिक बीमारी भी हो सकती है या दांत उगने से पहले किसी संक्रमण के कारण भी हो सकती है.
- दांतों की रंग विकार - इसका मतलब है सामान्य दांतों से अलग रंग में दिखाई देना इसका कारण हो सकता है तम्बाखू का सेवन,गुठका खाना, दांतों की सही प्रकार से सफाई नही होने पर या किसी प्रकार का संक्रमण होने पर भी दांतों में विकार हो सकता है
- तुलसी - तुलसी एक एंटीबायटिक व एंटीसेप्टिक पौधा है इसके तेल या पत्ती का उपयोग अपने दांत को साफ करने में कर सकते है. इससे संक्रमण सम्बंधित सारी प्रॉब्लम ठीक होती है. पत्ती को सुखा कर मंजन की तरह अपने दांतों में लगाने से दांत मजबूत रहती है और मुह से बदबू भी नही आता. यह बहुत गुणकारी होती है .
- आवला- आवले में विटामिन C व बहुत सरे पोषक तत्त्व पाए जाते है जो दांतों को मजबूत बनाते है .
- नमन - नमक का भी अपने दांतों को साफ करने में उपयोग किया जाता है क्योकि इतिहास गवाह है नमक में कभी कीड़े नही लगते इसलिए आप नमक से दांतों की सफाई कर सकते है.
- पुदीना - यह भी तुलसी की तरह गुणकारी होती है इसमें भी एंटीबायटिक जो मुह के संक्रमण को दूर करती है और मुह के दुर्गन्ध,सडन,कीड़ो से दांतों को सुरक्षित रखते है.
- नीम- इसमें उपस्थित एंटीबायटिक व एंटीसेप्टिक तत्त्व मुह के जीवाणु को मार देते है मुह से दुर्गंद भी नही आता है . आप ब्रश के जगह नीम के दातुन का उपयोग करें और इसके तेल से दांतों की मालिश करें.
- लौंग - लौंग के तेल से दांतों की मालिश करने पर दांत मजबूत होता है और कीटाणु मुक्त हो सकते है.


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