जीभ वह मांसपेशीय है जिसका मुख्य दो कार्य होते है पहला खाने को अन्दर की ओर ले जाना और स्वाद का पता लगाना है. दूसरा मानव स्वर को कण्ट्रोल करना होता है.यह श्वसन कार्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है सर्दी होने पर कई लोग नाक के बजाय मुह से जीभ की मदत से श्वास क्रिया करते है. यह लाल गुलाबी रंग का नोक की तरह होता है.इसमें स्वाद कलिकाएं होती है जो मस्तिक के विभिन्न भागो से जुड़ी होती है और स्वाद के बारे में संकेत देता है. जीभ के उपरी परत में छोटे-छोटे दानों के समूह बनें होतें हैं. जीभ गुलाबी और किसी किसी के थोड़े काले रंग के भी होते है. यह काला रंग जीभ के विकार भी हो सकता है. जीभ की संरचना जटिल होती है जो हमारे मुह में चार प्रकार के स्वादों का पता लगाती है. मनुष्य की जीभ की लम्बाई 10cm तक हो सकती है. जीभ से सम्बंधित किसी भी प्रकार के रोग होने पर या ऐसे स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाये और उचित उपचार करें.
जीभ के निम्न कार्य :
लार : भोजन या किसी वस्तु को चबाते समय लार उत्पन कर भोजन को चबाने में मदद करता है.
निगलना : जीभ भोजन निगलने में भी मदद करती है।
स्वाद: जीभ पर मौजूद हजारो स्वाद कलिकाएं स्वाद के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं और स्वाद को महसूस करने में सहायता करती हैं.
तरल द्रव: अंग मुंह को नम रखते हुए श्लेष्मा और सीरस तरल पदार्थ भी स्रावित करता है.
स्वर उत्पन्न करने में सहायता करना.
जीभ की निम्नलिखित संरचना होती है जो इस प्रकार है :-
जीभ की संरचना एक मांसपेशियों का वह द्रव्यमान है जो एक श्लेष्म झिल्ली से ढका होता है। इसके दो भाग होते है
पूर्वकाल भाग
पश्च भाग
जीभ के आगे भाग में जीभ के अंग शीर्ष व शरीर उपस्थित होते है और यह सल्कस टर्मिनलिस पर समाप्त होता है; यह भाग फोरामेन सीकुम से पैलेटोग्लोसल आर्च की ओर तिरछी दिशा में पार्श्व रूप से फैला हुआ होता है. पृष्ठीय सतह की म्यूकोसा परत बनी होती है एक मध्यरेखा नाली जीभ के सिरे से फोरामेन सीकुम तक ऐटेरोपोस्टीरियर दिशा में चलती है.यह अंग के मध्य लिंगीय पट और हाइपोइड हड्डी में सम्मिलन का भी प्रतिनिधित्व करता है। जीभ के पश्च भाग पर पतेदार पेपिला सिलवटो की एक श्रृंखला में व्यवस्थित होती है.उदर म्युकोसा और पार्ष म्युकोसा दोनों चिकना और निरंतर होते है.
पश्च भाग
अंग का पिछला भाग अंग के आधार से बना होता है. यह पैलेटोग्लोसल सिलवटों के पीछे स्थित होता है और ऑरोफरीनक्स की पूर्वकाल की दीवार के रूप में कार्य करता है. इस भाग में कोई लिंगुअल पैपिला नहीं होता है और म्यूकोसा लसीका ऊतक से भरा होता है जिसे लिंगुअल टॉन्सिल के रूप में जाना जाता है. म्यूकोसा पार्श्व तालु टॉन्सिल, पार्श्व ग्रसनी दीवारों और ग्लोसोएपिग्लॉटिक और एपिग्लॉटिस सिलवटों के म्यूकोसा के साथ भी निरंतर होता है.
स्वाद कलिकाओं की संरचना
स्वाद कलिकाए जीभ,गले,तालू पर स्थित स्वाद रिसीवर होती है जो स्वाद के बारे में जानने में हेल्प करती है.स्वाद कलिकाए भोजन और अन्य पदार्थो के लार में उपस्थित रसायनों का पता लगाकर न्यूरान्स के माध्यम से स्वाद की जानकारी मस्तिष्क तक पहुचाती है.स्वाद रिसीवर 50-100 के समूह में भोजन व अन्य पदार्थो की लार के रसायनों के साथ आपस में क्रिया करती है और प्रत्येक समूह में एकत्र होकर सभी एक सही समूह में एकत्र होती है.
बाह्य मासपेशियां
जीभ की कई बाहरी मांसपेशियां होती जो अंग के बहार से निकलती है और कुछ बिन्दुओं पर प्रवेश करती है.जो इस प्रकार है :-
- पेलाटोग्लोसस- इसमें निगलने की प्रक्रिया होती है
- होय्मग्लोसस - अंग को कमजोर करता है
- स्टाइग्लोसस-जीभ के किनारें को ऊपर खिचता है और जीभ को पीछे खिचता है
- गेनियोग्लोसस - अंग को दबाता और फैलता है
- गेनियोह्योइड - मंडीबल को जादा दबाता है और ह्योइड को बढाता है.
इसमें में तीन प्रकार की ग्रंथिया फैली होती है श्लेष्मा ग्रंथिया,सीरस ग्रंथिया ,लसीकापर्व यह लार का निर्माण करती है जो भोजन को चबाने,निगलने और पचाने में मदद करती है.
जीभ में स्वाद के लिए उपस्थित भाग
स्वाद कोशिकाओं के द्वारा 5 स्वाद का पता लगाया जा सकता जो इस प्रकार से है:-
- खट्टा- अम्लीय पदार्थो के योगिक जैसे : सिरका,साइट्रिक ऐसिड के कारण खट्टा स्वाद का अनुभव होता है
- मीठा -मीठा स्वाद सुक्रोज और फ्रुक्टोज के कारण होता है.
- नमकीन-नमकीन स्वाद सोडियम क्लोराइड और सोडियम बाइकार्बोनेट से बनता है। पोटेशियम, लिथियम और अन्य क्षार धातु आयन युक्त नमक भी हल्का नमकीन स्वाद पैदा करते हैं.
- कडवा- कड़वा स्वाद कई प्रकार के कार्बनिक यौगिकों द्वारा निर्मित होता है.
- मसेला - यह मुख्यतः मांस में पाया जाता है.
जीभ में होनें वाले बीमारियाँ
जीभ में कई प्रकार की बीमारियाँ होती है जो इस प्रकार से है
- जीभ से निकलने वाली द्रव या लार से बदबू आना.
- रंग में परिवर्तन होना जैसे काला,लाल,सफ़ेद हो जाना.
- जीभ पर दरारें पड़ जाना.
- छाले पड़ जाना.
- घाव हो जाना.
- दर्द होना.
- अल्सर हो जाना.
- नसों में परेशानी होना.
- कैंसर.
- संक्रमण.
- स्वाद का सही पता ना लगना.
- बाल वाले जीभ
- जीभ के आकार में बदलाव होना.
जीभ में होनें वाले बीमारियों से बचाव
- बैक्ट्रिया नाशक दवाई का उपयोग करें
- ग्लिसरीन को गुनगुने पानी में मिला कर कुल्ला करें
- ब्रश करते वक्त चोट लग सकती है इसलिए धीरे-धीरे करें.
- मसालेदार खानों से दूर रहे.
- गर्म खाने से जीभ जल सकती है. इसलिए आराम से खाए.
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