कान की संरचना
कान वह अंग है जिससे कोई आवाज अन्दर प्रवेश करती है और मस्तिस्क तक पहुचती है. मुख्यः आवाज सुनने में मदत करती है. शरीर के संतुलन और स्थिति का बोध कराती है.कान की बिमारिया आम होती.बच्चो में ये बीमारी जादा देखी गयी है.बचपन में कान में संक्रमण होने से आंशिक बहरापन या पूर्ण बहरापन हो सकता है.कान से सम्बंधित किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और उचित सलाह लेना चाहिए.
कान के भाग
कान के तीन भाग होते है जो इस प्रकार से है :-
- बाहरी कान
- मध्य कान
- भीतरी कान
बाहरी कान
- पिन्ना : पन्ना वह भाग है जो बाहरी सिर के किनारे होता है.यह सभी ध्वनियों को रोककर कान के अन्दर भाग भेजने में हेल्प करती है. यह कान का पहला चरण होता है.पिन्ना के इस कार्य को ध्वनी पृथककरण भी कह सकते है.
- ट्यूब व टाम्पैनिक झिल्ली: इसे बाहरी कान ट्यूब कहते है और टाम्पैनिक झिल्ली बाहरी कान और मध्य कान को दो भाग में विभाजित करता है.
मध्य कान :
यह एक छोटी संकीर्ण हवा से भरी गुहा है.मध्य कान वह भाग महत्वपूर्ण संवेंदनशील होता है .यह बाहरी कान से भीतरी कान तक संकेतो को भेजता है. इसमें तीन हड्डियों का एक समूह होता है जो तीन अलग-अलग गतिविधियाँ करता है.
1.संक्रमण
कानो में किसी प्रकार का संक्रमण होने पर उसके जीवाणु आपके कानो को नुकसान पहुचना सुरु कर देता है,इससे कानों में खुजली,दर्द होने लगता है.
2.कान में घाव हो जाना
कान में संक्रमण के कारण फोड़े हो जाते है और घाव बना देते है. घाव से पानी निकालने लगता है.
3.कान का कैंसर भी हो सकता है.
कान में रोज के कुछ लक्षण हो सकते है
- कान से पानी निकलना.
- कान में जलन होना .
- कान में गर्म महसूस करना.
- कान में खुजली होना.
- आवाज से कानों कम्पन होना .
- कान में फोड़े होना
- कान लाल पड़ जाना
- कान में भारीपन महसूस होना.
- कान में दर्द होना
- कान में सुजन रह सकती है.
कान के रोगों से बचाव के उपाय
कान के रोगों के बचाव के लिए निम्न उपाय जो इस प्रकार से है:- कानों की नियमित सफाई करें स्वम करने की कोशिश ना करें किसी कान के डॉक्टर से ही कराये .
- किसी भी वस्तु को अपने कान में ना डाले.
- अपने कान को ना रगड़े ऐसा करने से जलन हो सकती है
- कान में नहाते वक्त साबुन लगाने पर अच्छे से धुलाई करें. ऐसा नही करने कान में फोड़े फुंसी हो सकते है
- कान में बिना डॉक्टर के सलाह से कोई भी आयल कान में ना डाले.
- घाव होने पर साबुन का उपयोग ना करें.
- खुजली ना करें वर्ना खुजली और बड़ सकती है.
- कान में ऊँगली ना डाले.
- पिन,कोई नुकीली वस्तु कान में ना डाले.
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