पेज

मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

Knowledge: हड्डी(bones) की परिभाषा,प्रकार,स्थिति व विकार,उपचार,सलाह


हड्डी(bones) की परिभाषा,प्रकार,स्थिति व विकार

हड्डी (bones)

हड्डी हमारे शरीर को आकार देने का प्रमुख अंग है यह शरीर को आधार देता है . यह शरीर के अंग के अनुशार अपना आकार देता है. हड्डी चलने में भी सहायता करता है. यह लगातार अपने आप को बढ़ाते रहता है, इसके आकार में या क्रिया में परिवर्तन होते रहता है. उ.दा. जन्म से मृत्यु तक शरीर के हड्डी में परिवर्तन चलता रहता है.जन्म के समय ३०० हड्डी और वयस्क होते होते  में 2०6 हड्डी होती है. ऐसा इसलिए होता है क्योकि वयस्क होते होते कुछ हड्डियां आपस में मिल जाती है. आपकी हड्डियाँ आपको चलने,उठने,बैठने,दौड़ने में सहायता करती है. हड्डियाँ अन्दरी अंगो को सुरक्षा प्रदान करती है. हड्डियाँ कोशिकाओं और प्रोटीन से बनी होती है. हड्डियाँ कैल्सियम को एकत्र करती है इसलिए यह कैल्सियम का प्रमुख स्त्रोत है. जिसके कारण हड्डियाँ मजबूत और सफेद रंग की होती है. हड्डी टूटने पर यह तीव्रता से जुड़ जाती है. यह शरीर के कोमल अंगो के आकार ले कर उनकी रक्षा करती है. जैसे खोपड़ी कंकाल,पसलिया,रीड की हड्डी,हाथ व पैर की हड्डियाँ आदि.

हड्डियों में जुड़ने वाले ऊतक 

  • मांसपेशीय-मांसपेशिया वह होती है जो आपके शरीर में चर्बी के रूप में हड्डी के साथ चिपकी होती है. यह आपको चलने,उठने,बैठने,पाचन,सांस् क्रिया में मदत करते हैं जैसे ह्रदय,फेफड़ा.
  • नसें- यह नलिका होती है जो पुरे शरीर में फैली होती है यह हमारे शरीर में भोजन से प्राप्त उर्जा को रक्त के माध्यम से पुरे शरीर में पहुचाती है.
  • पट्टा - यह आपकी मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ता है 
  • जोड़ (लिंगामेंट)- आपके शरीर में 900 से अधिक जोड़ होते है. आपके शरीर को मोड़ने में काम आता है जैसे घुटना,कोहनी,कलाई,उंगली .
    हड्डी(bones) की परिभाषा,प्रकार,स्थिति व विकार,उपचार,सलाह

हड्डियो के प्रकार 
हड्डियों के उनके आकार के अनुसार कुछ प्रकार बताये गए है जो इस प्रकार से है:
  1. लंबी हड्डिया(long bones)- लंबी हड्डी आपके पैर में,हाथ में,जांघ में, होती है. जो कठोर व सबसे मजबूत होती है  
  2. छोटी हड्डी - छोटी हड्डियाँ लंबी हड्डियों से थोड़े छोटे और पतले होते है. जैसे हाथ,कलाई,
  3. चपटी हड्डी - चपटी हड्डियाँ खोपड़ी पसलियाँ और हँसली में होते है जो चौड़ी और कम गोल आकार के होते है.
  4. सीसमाइड हड्डियाँ- सीसमाइड हड्डियाँ एक टोपी की तरह होती है जो पट्टा में होती जैसे ; घुटने के टोपी
  5. अनियमित हड्डी - अनियमित हड्डियाँ वह होती है जो बाकी चार प्रकार के हड्डियों से अलग होती है यह आपके रीड की हड्डियों में पाया जाता है जिसकी संख्या ३३ हो सकती . यह लचीली होती है जो आपस में पट्टा से जुड़े है. इस जोड़ में चिकना पदार्थ होता है इसी में आपके मेरुरज्जु सुरक्षित रहती है.  
हड्डियों के कुछ स्थिति में विकार 
हड्डियों में कुछ स्थिति में विकार हो सकते है जो इस प्रकार है 
  • हड्डी का क्रेक होना- हड्डी में क्रेक दुर्घटना या गिरने से हो सकता है. इस स्थिति में हड्डी अपने स्थान से हट जाता है या टूट जाता है या क्रेक हो जाता है . ऐसी स्थिति में आपको डॉक्टर के पास जाना चाहए.जो आपका उचित इलाज कर सकते है.
  • ऑस्टियोपोरोसिस -ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों का बीमारी है जो हड्डी को नुकसान पहुचने का काम करती है. यह आपको ६० वर्ष के लोगो में अधिक दिखाई देगा. यह हड्डी को इतना कमजोर कर सकता है की वह थोड़े-थोड़े कारणों से टूट सकता है.
  • पोषण पहुचाने वाले नसें- पोषण पहुचाने वाले नसें अगर सही ना हो तो हड्डी में विकार हो सकता है. जैसे विकलांग होना
  • रिकेटस - यह बच्चो में हो सकता है. जिससे हड्डी में  सही विकास नही हो पाता और बच्चा विकलांग हो सकता है.
हड्डियों के रोगों का उपचार व सलाह 
  • हड्डी में क्रेक हो जाने पर डॉक्टर के पास जाये और अपना इलाज कराए.यह आपके लिए जरुरी है अन्यथा यह तेज दर्द का कारण भी बन सकता है जो आपके लिए असहनीय हो सकता है या आप आयुर्वेद उपचार भी कर सकते है.
  • पोषण पहुचाने वाले नसों में परेशानिया होने पर आप अपने नसों की मालिश करें. जरुरी आहार ग्रहण करें.नियमित कसरत करें.
  • ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज के लिए आप डॉक्टर के  सलाह से कोई उचित दवाइयों का सेवन करें.रोज कसरत,जरुरी आहार,विटामिन आदि ग्रहण करें. योगासन योग करना शरीर के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है.इसलिए नियमित किया करें.
  • रिकेटस - यह विटामिन D की कमी से होता है इसलिए सूर्य के धूप की रौशनी लेने से यह बीमारी ठीक होती है. इसके लिए सुबह व शाम की धूप सही रहती है.
  • कैल्शियम व प्रोटीन की कमी - कैल्शियम व प्रोटीन की कमी से आपकी हड्डी कमजोर होती है इसलिए कैल्शियम व प्रोटीन युक्त आहार जरुरी है. कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए आप नारियल,दुध का सेवन करें.

प्रमुख हड्डियों के बारें में जानकारी 
  • हाथ- बाह से उंगलियों तक हाथ कहलाती है.जिसमे उंगली,पंजा,बाह,कलाई,भजा की हड्डी होती है. इनमें  छोटी हड्डी होती है.
  • खोपड़ी कंकाल(skull bones) - यह हमारे सिर के पुरे हिस्से को कहते है जो चपटी आकार की होती है. यह पर हमारा मस्तिष्क,आंख,कान मुह,बाल जुड़े होते है.
  • पैर-मनुष्य के टांग के अंतिम हिस्से को पाव या पैर कहते है. आपका पैर आपके सारे शरीर का भार वहन कर सकता है. मानव शरीर में दो पैर होता है. 
  • जांघ- कमर से  घुटने तक के हिस्से को जांघ कहते है यह शरीर का सबसे मजबूत हिस्सा होता है. इसमें लंबी हड्डी होती है.
  • उँगलियाँ- हाथ पर छोटी छोटी हड्डियाँ होती है उसे हम उंगली कहते है यह हाथ का अंतिम हिस्सा होता है. इनका कार्य खाना खाना,पकड़ना है 
  • कोहनी -बाह से कलाई तक के हिस्से को अलग करने वाले भाग को कोहनी कहते है. यह दोनों का जॉइंट होता है.
  • घुटना- जांघ से पैर को अलग करने वाली भाग को घुटना कहते है.इसमें कैप लगा होता है यह दोनों का जॉइंट होता है.
  • कलाई- कलाई वह है जिसमे आप अपनी हाथ के उंगली यो आसानी से हिला डुला सकते हो,मोड़ सकते हो, 
  • पिडली - घुटने से पैर तक के हिस्से को पिडली कहते है. 
  • मेरुरज्जु - मस्तिष्क के निचे से एक रज्जू निकलती है जो रिंड की हड्डी के बिच में होती है.यह हमारे शरीर के लिए आवश्यक है.
  • रिंड की हड्डी- रिंड की हड्डियाँ आपके पीठ में होती है. जिसकी संख्या 33 होती है.यह लचीला होता है जो आपस में पट्टा से जुड़े होते है.इस जोड़ में चिकना पदार्थ होता है इसी में आपके मेरुरज्जु सुरक्षित होती है.
  • पसलिया- पसलिया आपके ह्रदय व फेफड़े को सुरक्षित रखती है. छाती पर जो हड्डिया होती वो पसलिया होती है.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें