रीढ की हड्डी
रीढ़ की हड्डी या मेरुदंड उसको कहते है जो आपके सिर के मस्तिष्क के पीछे वाले भाग से निकलकर आपके गुदा के पास तक जाती है. इस मेर्रुदंड के अन्दर उसके नाल में जिसमे 33 खंड होते है वह पर मेरुरज्जु सुरक्षित तरीके से रहता है. मेरुदंड लचीला होता है जिस कारण घुमने,मुड़ने,झुकने,और उठने,चलने और कुछ उठाने में शक्ति देती है. यह शरीर का महत्वपूर्ण हड्डी है जो शरीर के लिए अवश्यक है . इसकी लम्बाई पुरुषों में लगभग 45 cm और महिलओं में 43 cm लम्बाई होती है. रीढ की हड्डी में उपस्थित मेरुरज्जु जो हमारे शरीर में संकेत का आदान प्रदान कर उसकी सुरक्षा करता है. रीढ़ की हड्डियों में नुकसान होने पर आप पैरालिस हो सकते है. हमें अपने शरीर के प्रत्येक भाग का ध्यान रखना चाहिए जिससे आपके शरीर को किसी प्रकार की कष्ठ ना हो सके.
रीढ़ की हड्डी के तीन मुख्य भाग होते है
- ग्रीवा ( गर्दन की हड्डियाँ)
- थोरेसिक(छाती की हड्डियाँ)
- काठ(पीठ के निचे का हिस्सा)
रीढ़ की हड्डी के नसें
रीढ़ की हड्डी के नसें जो शरीर के निम्न भागो से संकेतो को मस्तिष्क तक पहुचाती है वो इस प्रकार से है:
- ग्रीवा या गर्दन की हड्डियों में चेहरे व गले यानि गले से सिर तक की नसे होती है. इसमें आठ ग्रीवा तंत्रिका होती है.
- वक्षस्थल की नसें जो 12 होती है ये आपके छाती,उपरी पीठ और पेट पर होती है.
- काठ की नसें जो पांच होती है यें आपके पीठ की निचे के हिस्से जो पैरों तक होती है.
- त्रिक नसें जो पांच होती है ये आपके पीठ की निचे के हिस्से से श्रोणि तक फैली होती है.
कुल नसें की जोड़ की संख्या 31 होती है जो इन सभी भागों से संकेतों को एकत्र कर हमारे मस्तिष्क तक पहुचती है और आपको महसुस करने में सहायता करती है.इन नसों व हड्डियों में कभी कभी परेशानिया उत्पन्न होने लगती है.
नसों व रीढ़ की हड्डियों(पीठ दर्द) में दर्द होने के कारण
कभी कभी गर्दन व रीढ़ की हड्डियों(पीठ दर्द) में दर्द होने लगता है इसका मुख्य कारण कुछ इस प्रकार से है:
- मांसपेशीय में खिचाव होना
- मांसपेशीय या हड्डी को सोते समय सही आधार ना मिला हो.
- मांसपेशीय में चोट लगने के कारण
- रीढ़ की हड्डियों में किसी प्रकार की चोट या स्क्रेच आने पर
- किसी प्रकार का संक्रमण होने पर
- खून की प्रयाप्त मात्रा ना मिलने पर या ब्लाक होने पर
इसके कुछ सामान्य लक्षण हो सकते है :
- गर्दन व पीठ पर दर्द रहना
- गर्म महसुस होना
- बुखार आना
- सिरदर्द
- आलस्य आना
- साँस लेने में तकलीफ होना
- रीढ़ की हड्डियों के मुख्य काम आपकी शरीर में संकेतो को पहुचना है.
- शरीर की कार्यविधियों को कण्ट्रोल करता है.
- शरीर के अंगो से प्राप्त संकेतो को मस्तिष्क महसुस करता है और कण्ट्रोल करता है और आपको निर्देश देता है.
- मस्तिष्क को बाहरी चोटों की सुचना देती है.
- शरीर पर लगे चोट या दबाव के संकेतो को मस्तिष्क तक पहुचता है.
- अनैक्छिक कार्यों को भी क्रियावानित करने में मस्तिष्क की सहायता करता है.
- मेरुरज्जु की सुरक्षा का भार रीढ़ की हड्डियों पर होती है.
- बीमार होने पर होने वाले परेशानियों कें संकेतों को पहुचती है.
- रीढ़ की हड्डियों में फ्रैचर होना - गिरने,दुर्घटना या किसी कारणवस आपके हड्डियों में फ्रैक्चर हो सकता है.
- रीढ़ की हड्डियों का कमजोर होना - सही पोषण या विटामिन d की कमी के कारण आपकी हड्डियाँ कमजोर हो सकती है.
- रीढ़ की हड्डियों के नसों में विकार- चोट लगने के कारण नसों में विकार हो सकता है.
- रीढ़ की हड्डियों में ट्यूमर - हड्डी में ट्यूमर या कैंसर होने पर इनको नुकसान होने लगता है.
- रीढ़ की हड्डियों में संक्रमण भी हो सकता है. जिससे आपको गम्भीर समस्या हो सकती है.
- रीढ़ की हड्डियों में तरल पदार्थ की कमी हो सकती है जिसके कारण हड्डी के जोड़ में घिसाव हो सकता है.
- रीढ़ की बाहरी सुरक्षा परत को नुकसान होने रिंड की हड्डी कमजोर होती है.इसलिए इसका ख्याल रखना जरुरी है.
रीढ़ की हड्डियों की निम्न तरीको का पालन कर सुरक्षा प्रदान कर सकते है जो इस प्रकार से है :
- हरी सब्जियों व पोष्टिक आहार का उपयोग करें.
- फल व मोटे अनाज का आहार करें.
- नियमित व्यायाम करें.
- हड्डियों के लिए उचित योगासन करें.
- किसी भी मादक पदार्थो का उपयोग ना करें.
- धुम्रपान ना करें.
- अच्छी नींद के साथ उचित स्तिति में सोया करें.
- किसी भी नशीले दवाई से दुरी बनाये
- खाने के बाद रोज 30 मिनट तक टहले.
- मसाज आयल से अपने शरीर की मालिश करें.
- आलस्य का त्याग करें.
- कैल्सियम युक्त आहार लें.
- आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थो का उपयोग करें.
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