फेफड़ा श्वसन तंत्र का प्रमुख अंग है. जो नाक व मुह द्वारा किये गए साँस क्रिया में जो हवा प्राप्त होती है उसमे से ओक्सिजन को ग्रहण कर बाकी कार्बन डाईऑक्साइड को बहार करती है. जो की हमारे लिए हानिकारक गैस होती है.फेफड़े द्वारा ही श्वसन तंत्र पूर्ण होती है. मनुष्य के छाती में दो फेफड़े होते है. इन फेफड़ो में बहुत सरे छोटे -छोटे छिद्र होते है. छोटे छिद्रों का बंद होना हानिकारक होता है. फेफड़े को श्वसन तंत्र का पंप सिस्टम कहा जाता है. आपका यह फेफड़ा ह्रदय के दोनों ओर छाती के अन्दर स्थित होती है. यह स्पंज की तरह दिखाई देती है. साँस लेने पर गुबारे की तरह फूलता और सिकुड़ता है.
फेफड़े की कार्य विधि
फेफड़ा नाक द्वारा साँस को अन्दर लेता है जब वह इस प्रक्रिया को करता है तो वह गुब्बारे की तरह फूल जाती है.एक प्रकार से थैली की तरह फूल जाती है. यह साँस से प्राप्त ओक्सिजन को ग्रहण व कार्बन डाईऑक्साइड को बाहर कर सिकुड़ जाती है. यह क्रिया निरंतर चलती रहती है. यह क्रिया मानव व अन्य जीव के लिए आवश्यक है. फेफड़ा एक लाल रंग में स्पंज की तरह होता है. इसमें कई छोटे-छोटे छिद्र होते है जो हवा को साफ करने में हेल्प करती है. मनुष्य के शरीर में दो फेफड़े होती है जिसके अलग-अलग पलिया होती है. दाए फेफड़े में तीन लोब और बाएं में दो पलियां होती है.फेफड़े के कार्य इसप्रकार है :-
- फेफड़ा आपको साँस लेने में हेल्प करती है.
- साँस छोड़ने भी हेल्प करती है.
- साँस की गंध की पहचान करता है.
- ऑक्सिजन गैस को ग्रहण का पुरे शरीर में भेजता है.
- co2 गैस जो हमारे लिए हानिकारक है उसको बाहर करता है.
- ठंडे हवा को फेफड़े में गर्म हवा में बदल सकता है.
- छोटे छिद्रों द्वारा हवा को साफ करता है.
मनुष्य को फेफड़े की कुछ बिमारियाँ भी हो सकती है जो इस प्रकार से हैं-
- अस्थमा - अस्थमा या दमा की बीमारी होने पर आपको साँस नाली में जलन,सुजन या सिकुडन हो सकती है. आपको साँस लेने में कठिनाई हो सकती है. आपको साँस लेने में परेशानी व सिने में दर्द हो सकता है.
- टीबी- टीबी की बीमारी में मनुष्य को साँस लेने में तकलीफ होती है. साँस के साथ बलगम व खून भी आ सकता है.यह जानलेवा बीमारी हो सकता है.इसमें खासी बुखार,सिने में दर्द हो सकता है.
- निमोनिया - निमोनिया होने पर आप साँस सही तरह से नही ले सकते है. निमोनिया ठण्ड के कारण होती है जो आपके शरीर में नमी बढाता है. फेफड़े को शिथिल कर देता है जिससे सरदर्द होना आम बात है. प्रायः यह बच्चो में अधिक होने की संभावना रहती है.
- फेफड़े का कैंसर- फेफड़े में कैंसर होने पर उसमे घाव की तरह बन जाती है यानि उसके सेल को नुकसान होने लगता है. जिसका सही समय पर उपचार नही करने पर मृत्यु हो सकती है. कैंसर होने पर फेफड़े नष्ट होने लगते है.यह प्रायः घुटका,तम्बाखू खाने वाले को होता है.
- फेफड़े में संक्रमण- ये आपको सर्दी या जुखाम होने पर हो सकता है. इसमें पानी बल्गम के रूप में जम जाता है और सिने में दर्द ,तेज खासी हो सकती है.
- फेफड़े में छिद्रों का बंद होना- फेफड़े में छिद्रों का बंद होना आपके लिए हानिकारक हो सकता है यह श्वसन क्रिया को प्रभावित कर सकता है.
- बाहरी चोट- कभी दुर्घटनावश छाती को नुकसान होने पर घम्भीर परेशानी हो सकती है.
- अस्थमा होने पर आपको इन्हैलर का उपयोग करना चाहिए.
- हर रोज नियमित व्यायाम करना चाहिए.
- हरी व ताजी सब्जियों का सेवन करना चाहिए.
- योगा करना चाहिए यह आपके लिए फायदे मन हो सकता है.
- धुम्रपान नही करना चाहिए.
- घुटका,तम्बाखू का सेवन नही करना चाहिए.
- ठंडे जगहों पर ना जाये.
- प्रदुषण वाले स्थान से दूर रहें.
- नियमित 30 मिनट तक कसरत करना चाहिए.
- फेफड़े के छिद्रों को खोलने के लिए प्राणायाम योग करना चाहिए
- मास्क का उपयोग करना चाहिए.
- संक्रमण या खासी होने पर तुलसी का काड़ा पिया करें.
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बहुत बढ़िया
जवाब देंहटाएंथैंक्यू
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