प्रजनन
अपने समान जीव उत्पन्न करने की क्षमता को प्रजनन क्रिया कहते है. इसमें उख्य भूमिका शुक्राणु की होती है शुक्राणु मादा के अंडकोष में अंडे का निर्माण करती है और गर्भाशय में भेजती है और गर्भ धारण करती है. यह प्रक्रिया धीरे-धीरे समय अनुसार होती है. मानव में 9 माह का समय होता है. वाही दुसरे जीवों में समय में अंतर हो सकता है.
पुरुष प्रजनन अंग
लिंग (panis)
आपका लिंग श्रोणि हड्डियों से जुड़ा होता है. जो एक शैप्ट का हिस्सा होता है. शंकु के आकार का दिखने वाला अंतिम भाग को ग्लांस पेनिस कहते है. इस ग्लांस पेनिस के नोक पर मूत्रमार्ग बना होता है जहा से वीर्य व पेशाब बाहर निकलता है. आपके लिंग में इरेक्ट्रइल ऊतक में उपस्थित तिन बेलनाकार स्थान जो खून से भरी रहती है जो मूत्रमार्ग के आस पास के हिस्से को घेरे रहती है.जब यह जगह भार जाती है तो लिंग में इरेक्सन होता है.
वृषण कोष
वृषण कोष मोटे चमड़ी से बना होता है जो वृषण के ऊपर बना होता है और उसकी सुरक्षा करता है. वृषण को ठंडा कर रखता है ताकि वीर्य का निर्माण सही तरीके से हो सके.
वृषण
वृषण या नर अंडाशय भी कह सकते है जिसमें शुक्राणु का निर्माण होता है. यह अंडाकार होते है जिसकी संख्या दो होती है. बाया वाला वृषण दाये वाले वृषण से निचे लटका रहता है. इसके दो कार्य है 1. वीर्य उत्पन्न करना 2. टेस्टोस्टेरान उत्पन्न करना होता है.
एपीडीडीमिस
एपीडीडीमिस में लगभग २० फीट लम्बी एक काइल्ड माइक्रोस्कोपिक टूयूब होती है. इसका कार्य शुक्राणु को एकत्र करना है और स्त्री बीज क्र रूप में शुक्राणु को तैयार करता है.
वास डिफरेंट
वास डिफरेंट एक मजबूत ट्यूब होती है जो एपीडीडीमिस से वीर्य को ले जाती है और शुक्राशय से जुड़ जाती है.
मूत्रमार्ग
आपका यह मूत्रमार्ग ग्लास पेनिस के अंतिम हिस्से में होता है जहा पर छिद्र बना होता है जिससे मूत्र व वीर्य निकलती है.
प्रोस्टेट
प्रोस्टेट मूत्राशय के निचे उपस्थित होता है जो मूत्रमार्ग को घेरे रहते है. उम्र के साथ साथ इसकी आकार में भी वृधि होती है. प्रोस्टेट का बड़ा होना मूत्रमार्ग के ब्लाकेज का कारण भी हो सकता है.
शुक्राणु का निर्माण
जब शुक्राणु तरल पदार्थ प्रोस्टेट में बहने लगते है और वास डिफरेंस सें मिल जाते है. तब प्रोस्टेट और शुक्राशय में ये तरल पदार्थ वीर्य विकशित करते है. जो इजेकुलेसन के दौरान बहने लगते है.
महिला प्रजनन अंग
योनी में प्रजनन,मासिक धर्म,गर्भाशय और प्रसव में मुख्य भूमिका निभाती है. योनी एक खीचावदार,मंसल नलिका होती है जिसकी फैली हुई मांसपेशिया ट्यूब बाहरी योनी छिद्र से गर्भाशय ग्रीवा तक पोस्टेरोसुपिअर रूप में फैली होती है.
फैलोपियन ट्यूब
फैलोपियन ट्यूब गर्भाशय और अंडाशय के बीच में मार्ग का काम करता है. जब अंडाशय में अंडे का निर्माण होता है तो यह ट्यूब अंडे को गर्भाशय की ओर ले जाने का कार्य करता है.
फिम्ब्रिया
फिम्ब्रिया ट्यूब फैलोपियन ट्यूब के अंत में स्थित होता है फिम्ब्रिया सिलिया या बल जैसे संरचना में पंक्तिबंध होते है जो अंडे को गर्भाशय तक ले जाने का कार्य करता है.
अंडाशय
अंडाशय यह महिलाओं के शरीर में हार्मोन्स व अंडाणु उत्पन्न करने का कार्य करता है. यह शुक्राणु के साथ निषेचन करता है और अंडा का निर्माण करता है और गर्भाशय में भेजती है.
गर्भाशय
यह नाशपाती के आकार का होता है जिसकी चौड़ा भाग पंड्स यथा पतला भाग निचे इस्थमस कहलाता है. यह 7.5 सेंटीमीटर लम्बी और चौड़ाई 5 सेंटीमीटर व 2.5 सेंटीमीटर दिवार मोटी होती है.
गर्भाशय में गर्भ धारण प्रक्रिया
जब हजारों की संख्या में शुक्राणु योनी द्वार से प्रवेश करता है तो जो अंडाशय तक पहुचते पहुचते एक ही शुक्राणु जीवित रह जाती है और एक ही शुक्राणु अंडाशय तक पहुच पाती है जो निषेचन प्रक्रिया पूर्ण कर अंडे के रूप में परिवर्तित हो जाती है. इसके बाद अंडा को फिम्ब्रिया फैलोपियन ट्यूब के मार्ग से गर्भाशय तक पहुचाती है. गर्भाशय में बच्चे का भ्रूण तैयार होने की प्रक्रिया सुरु होती है जो एक निश्चित समय के बाद पूर्ण रूप में आके योनी द्वारा बाहर आती है. कुछ स्थिति में अंडा भ्रूण नही बना पाती और माषिक धर्म चक्र द्वरा योनी द्वारा ब्लड के रूप में बाहर निकलती है.
जुड़वाँ बच्चे होने के कारण
समान रूप में होने वाले बच्चे- जब एक शुक्राणु अंडा के साथ निषेचन प्रक्रिया करता है और दो भागो में विभाजित हो जाता है तो होने वाले जुड़वाँ बच्चे एक समान होते है. इसमें लड़के-लड़के और लड़की लड़की होती है.
अलग अलग होने वाले बच्चे- जब शुक्राणु अलग- अलग अण्डों में होते है तो इस निषेचन प्रक्रिया में बच्चे अलग अलग होते है.
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