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शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

यकृत के संरचना व कार्य,रोग,लक्षण,रोग से बचने के उपाय

यकृत के संरचना व  कार्य,रोग,लक्षण,रोग से बचने के उपाय

 
यकृत(LIVER)

 यकृत यानि लीवर या जिगर,कलेजा भी कह सकते है. आपका यह लीवर शारीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है जो आपके पेट के अन्दर उपरी दाहिने हिस्से में ,डायाफ्राम के नीचे और पेट के दाहिने किडनी और आंतों के ऊपर स्थित होते है. इसका रंग लाल-भूरा होता है और इसके दो भाग होते है. एक मानव यकृत का वजन लगभग 1.5 किलोग्राम और चौड़ाई लगभग 15 सेंटीमीटर होती है.आपका यह यकृत पाचन तंत्र का हिस्सा है जो वसा को पायसीकृत करने में सहायता करता है जिससे वसा विघटित होता है. चूँकि वसा पानी में अघुलनशील होती है.इसलिए काइलोमइक्रान के रूप में अवशोषित करता है. मानव यकृत की खोज 200 ई. प्राचीन काल में चिकित्सकों ने ह्रदय और मस्तिस्क के साथ बड़े अंग के रूप में खोजा गया था.

यकृत की संरचना 

मानव शरीर में यकृत की संरचना इस प्रकार बताई गयी -

  • यकृत एक लाल-भूरे रंग का होता है जिसका कार्य भोजन से प्राप्त वसा को काइलोमाइक्रान के रूप में विघटित कर अवशोषित करना है. यकृत के दो भाग है इसका दक्षिण भाग बड़ा होता है जो पेरीटोनियम गुहा के बाहर रहता है.
  • यकृत रेशेदार संयोजी ऊतक से बना होता है इसे ग्लिसन कैप्सूल कहा जाता है.
  • यकृत की कोशिकाए की संरचना लोब्युल नामक सरल संरचना से होती है.
  • यकृत  की नली अमाशय से जुड़ी होती है 
  • लिपो प्रोटीन और एल्ब्यूमिन की बड़ी मात्रा में प्लाज्मा प्रोटीन का अनस्त्रावी स्त्राव हेपेटोसाइट्स द्वारा किया जाता है.

यकृत के प्रकार

यकृत के तीन प्रकार होते है जो लीवर को विभाजित करती है और पाचन क्रिया में सहायक होती है. जो इस प्रकार से हैं 

  1. प्रथम श्रेणी - प्रथम श्रेणी लीवर में आश्रय,प्रयास और भर के मध्य होता है.
  2. द्वितीय श्रेणी- द्वितीय श्रेणी में प्रयास और आश्रय के मध्य भार होता है.
  3. तृतीय श्रेणी- तृतीय श्रेणी लीवर में आश्रय व भार के मध्य प्रयास होता है.
यकृत के कार्य 
पाचन क्रिया में यकृत के निम्नलिखित कार्य है जो इस प्रकार से है -

  • आपके यकृत में पित्त रस का स्त्राव होता है. यह पित्त रस वसा को पय्सिकरण करने में सहायता करता है अर्थात वसा को छोटे-छोटे टुकड़ो में बांट देता है और पित्ताशय में पहुचता है.
  • आपके लीवर में ग्लुकगान हार्मोन पाया जाता है जो एक पेप्टाइड हार्मोन है. ग्लुकागान मुख्य रूप से यकृत कोशिकाए पर ग्लाइकोजेन अपघटन को प्रेरित करता है जिसके फलस्वरूप रक्त शर्करा का सतर बड जाता है.
  • यकृत अवश्यक पड़ने पर ग्लुकोष से ग्लाइकोजन में बदलकर संचय करता है.
  • यकृत वसा व प्रोटीन से ग्लूकोस का निर्माण करती है.
  • लीवर जहरीली अमोनिया को उरिया में बदल देता है जिसे मूत्र के द्वारा बाहर निकाला जाता है.
  • आपका यकृत कोशिकाए विटामिन A,D,लौह,तांबा आदि का संचय करती है.
  • यकृत की कुफ्फर कोशिकाएं जीवाणु तथा हानिकारक पदार्थो का भक्षण करके शरीर की सुरक्षा करती है.

लीवर में होने वाले रोग 

लीवर में होने वाले रोग जो पाचन क्रिया में बाधक बनते है वो इस प्रकार से है जो निचे दिया गया है.

  • संक्रमण- वायरल संक्रमण के कारण लीवर में सुजन हो सकता है. इससे हेपेटाइटिस A,B,C हो सकता है 
  • सही पाचन - आपको पाचन सम्बंधित परेशानी हो सकती है यह अनुवांशिक भी हो सकती है.
  • शराब से सम्बंधित रोग- आपको शराब पिने पर लीवर सम्बंधित रोग हो सकते है जैसे वसायुक्त यकृत रोग,सिरोसिस,लीवर फ़ैल होना,
  • फैटी लीवर- अगर आप अधिक शराब का सेवन करते है तो आपको फैटी लीवर की रोग हो सकती है जिसमे लीवर डैमेज हो सकता है.
  • सिरोसिस- इस रोग में लीवर के ऊतक की जगह ख़राब ऊतक जगह ले सकते है.
  • लीवर कैंसर - यह शरीर के दुसरे भाग से फैलता है.
  • पित्त स्त्राव के रोग इसमें पित्त सम्बंधित रोग हो सकते है.
  • ग्लूकोस का निर्माण ना कर पाना भी लीवर की बीमारी है.

लीवर में रोग के कारण 

लीवर में रोग होने के निन्म कारण हो सकते है जो इस प्रकार से है-

  • अगर आप अधिक शराब का सेवन करते है तो आपका लीवर में वसायुक्त सम्बंधित रोग हो सकता है.
  • धुम्रपान व तम्बाखू का सेवन करने पर इसके निकोटिन आपके लीवर को गन्दा कर सकते है. जिससे उसमे लीवर सम्बंधित रोग हो सकता है.
  • अनियमित जीवनशैली से भी आपकी लीवर ख़राब हो सकती है.
  • अधिक दवाई का उपयोग करने पर भी लीवर को दमैज हो सकता है 
  • अधिक समय तक मल व मूत्र को  रोककर रखने पर भी लीवर फ़ैल सम्बंधित रोग हो सकता है.
  • प्रदुषण से भी आपके फेफड़े सहित लीवर को भी हानि हो सकती है.

लीवर में होने वाले रोग के लक्षण 

लीवर में होने वाले रोग की पहचान इस प्रकार से कर सकते है जिससे आप समय पर अपना इलाज कर सकते है. आप निम्नलिखित लक्षण को पहचान कर लीवर के रोग को जान सकते है.

  • त्वचा व ऑंखें पिली पड़ जाती है 
  • पेट में दर्द व सुजन हो सकता है.
  • टांग व टखनों में सुजन हो सकती है.
  • पेशाब का रंग गहरा होना.
  • मल के रंग में बदलाव होना
  • गैस बनना और दर्द होना.
  • थकान महसूस करना,
  • त्वचा में खुजली होना,
  • उल्टी होना,
  • कमर में दर्द रहना,
  • नसों में दर्द व सुजन,
  • भूख ना लगना,
  • पाचन क्रिया का सही ना होना,
  • शरीर का वजन काम होना,
  • जी मचलना
  • बार-बार मल आना,
  • मल करते वक्त जलन होना.
लीवर की बीमारी से बचने का उपाय 
निम्नलिखित उपाय का प्रयोग कर आप लीवर में होने वाले रोग से बच सकते है जो इस प्रकार से है-
  • खूब पानी पिया करें.-पानी पिने से आपके शरीर को प्रयाप्त शक्ति मिलती है जिससे आपको पाचन क्रिया में आसानी होती है.
  • व्यायाम - नियमित व्यायाम करने से जीवन शैली में सुधार होती है और पाचन शक्ति बदती है.
  • स्वस्थ वजन- अधिक वजन का बढना सेहत के लिए हानिकारक है.
  • तनाव से दुरी- अगर आप तनाव से दुरी बनायेंगे तो आप कई बीमारी से बच सकते हो इससे आप ताजगी महसूस कर सकते हो.
  • नशीली व व्यसन- नशीली व व्यसन आपके लीवर के साथ जीवन के लिए भी हानिकारक है जो कैंसर का कारण होता है.इसलिए इसका सेवन ना करें.
  • मसालेदार भोजन से आपका हाजमा ख़राब हो सकता है पाचन सम्बंधित विकार हो सकता है. इसका अधिक सेवन नुकसानदायक है.
  • तली व वसायुक्त - ओइली फ़ूड शरीर के लिए हानिकारक होती है जो कई बीमारी का कारण हो सकता है. इससे बचें.
  • हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए जिससे आयरन,विटामिन,प्रोटीन प्राप्त हो सके.
  • विटामिन A,B,C,D युक्त आहार ग्रहण करें.
  • आयरन व प्रोटीन युक्त भोजन खाएं जैसे दाल,हरी सब्जी,दूध,दही,आदि.
  • चीनी का उपयोग ना करें यह मीठा जहर है.
  • नमक का कम सेवन करें
  • ग्रेन टा पिया करें यह शरीर के लिए फैदेमन होता है.
  • पूरी तरह पके हुए भोजन ही ग्रहण करें.
  • डायबिटीज व कोलोस्ट्रोल को कंट्रोल करें. यह रक्त संचार को बाधित करता है.

सलाह 
आपको उचित सलाह यही दिया जाता है की अगर आपको निन्म में से किसी भी लक्षण को जानने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ले और अपना उचित इलाज कराएँ. देरी आपके लिए लीवर फ़ैल होने का कारण बन सकता है जिससे आपकी जान भी जा सकती है. 

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