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गुरुवार, 25 जनवरी 2024

मौर्य साम्राज्य के सम्राटों का परिचय व पतन के कारण

मौर्य साम्राज्य

 मौर्य साम्राज्य 

मौर्य राजवंश या साम्राज्य 322 ई.पु. से185 ई.पु. तक एक शक्तिशाली राजवंश था. मौर्य साम्राज्य 137 वर्षो तक चली थी. सम्राट चद्र्गुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से मगध के राजा धनानद को मार कर मगध जैसे शक्तिशाली राज्य के राजा बना था. यह साम्राज्य मगध से शुरु होकर पुरे भारत भारत पर सहित ईरान,अफगानिस्थान देशो में भी मौर्य साम्राज्य फैला हुआ था. चद्रगुप्त मौर्य ने 322 ई पु. में इस साम्राज्य की स्थापना की थी. उस समय इनकी राजधानी पाटलीपुत्र थी. सिकन्दर के भारत पर हमला करने पर कई क्षेत्रिय राज्यों में मतभेद उत्पन्न हो गया था. जिसका फ़ायदा चद्रगुत मौर्य ने भली-भाति उठाया और मौर्य वंश को भारत में एक शक्तिशाली राजवंश बनाकर विश्वभर में ख्याति प्राप्त की.

सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य 

सम्राट चन्द्रगुप्त का शासन काल लगभग 322 ई.पु. से 298 ई. पु. तक था. बौध धर्म और जैन धर्म के अनुसार सम्राट चद्रगुप्त का जन्म पिप्प्लिवन में हुआ था. उनके पिता का नाम चंद्रवर्धन मौर्य थे जिसकी हत्या मगध के राजा धनानंद ने की थी. बचपन में चन्द्रगुप्त एक गोपालक के गुलाम हुआ करते थे एक दिन चाणक्य धनानद द्वारा अपमानित होकर रास्ते से जा रहा था तो उसने चन्द्रगुप्त को देखा उसमे एक राजा के गुण नजर आया . उसके बाद चाणक्य ने उस गोपालक से एक हजार पण देकर चन्द्रगुप्त को आजाद कराया और उसे तक्षशिला ले गए. तक्षशिला में सभी प्रकार के कलाओं में पारंगत कराया था. 317 ई.पु. चन्द्रगुप्त ने सम्पूर्ण सिंध और पंजाब को जीत लिया था. इसके पश्चात अपनी सेना सहित मगध पर आक्रमण कर दिया और तकालीन राजा धनानंद को युद्ध में हराया और मगध के सम्राट बन गया. इसके बाद वह सिकन्दर के जीते हुए राज्यों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया. 323 ई.पु. में सिकन्दर के मृत्यु के बाद सेल्यूकस सिकन्दर का उतराधिकारी बना. सेल्यूकस पुनः भारत पर हमला करना शुरु किया किन्तु चन्द्रगुप्त ने उसे हरा दिया उसके पश्चात् उनके बीच में संधि हुई और अपनी पुत्री हेलेना का विवाह चन्द्रगुप्त के साथ करा दिया. अब चन्द्रगुप्त एक विशाल सम्राज का सम्राट बन चूका था. चन्द्रगुप्त ने काबुल,बलुचिस्थान,पंजाब,गंगा-यमुना का मैदान,बंगाल,गुजरात,कश्मीर,कर्नाटक में अपना शासन स्थापित किया. 298 ई.पु. में सम्राट चन्द्रगुप्त ने जैन धर्म अपना लिया था और अपना राजपाठ त्याग कर संलेखना उपवास द्वारा सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपना शरीर त्याग दिया था. इस प्रकार सम्राट चन्द्रगुप्त ने 24 साल तक राज्य किया. इसके बाद अगला मौर्य साम्राज्य का उतराधिकारी सम्राट बिंदुसार बन जाता है.

सम्राट बिन्दुसार मौर्य 

सम्राट बिन्दुसार  मौर्य राजपथ ग्रहण करने के बाद जादा कुछ ना करते हुए पिता द्वारा छोड़े गए राज्यों पर ही शासन किया.बिन्दुसार ने 298 ई.पु. में मगध के राजा बने थे और 25 वर्षो तक शासन किया था. इनके काल में दो विद्रोह हुआ था उजैन और तक्षशिला में इस विद्रोह को दबाने के लिए सम्राट बिन्दुसार ने अपने बड़े बेटे सुसेन को भेजा किन्तु वह असफल रहा. उस समय अशोक उपराजा बने थे तो उन्हें इस विद्रोह को दबाने के लिए भेजा और वे इस विद्रोह को दबाने में सफल हो गए. सम्राट बिन्दुसार के पास 500 सदस्य वाली मंत्रीपरिषद थी जो उनके राज्य के कार्यों में सहायता करते थे. बिन्दुसार की मृत्यु 273 ई.पु. में हुई थी.

सम्राट अशोक द ग्रेट 

सम्राट अशोक भारत में ही नही वरन पुरे विश्व के इतिहास में महान राजा के रूप में ख्याति प्राप्त है. सम्राट अशोक की पत्नी का नाम देवी था. जिससे महेंद्र और संघमित्र का जन्म हुआ था. पिता के शासन काल में अशोक ने उजैन और तक्षशिला के विद्रोह को पूरी तरह से दबा दिया था. सम्राट अशोक ने अपने 99 भाई का हत्या कर 272 ई.पु. में मगध के नये सम्राट के रूप स्थापित हो गए थे.सम्राट अशोक के समय में उड़ीसा के कलिंग में विद्रोह उत्पन हो गया था. जिसका दमन करने के लिए सम्राट अशोक ने कलिंग में भीषण नरसंहार कर दिया था. इस नरसंहार को देखकर सम्राट अशोक को बहुत ग्लानि हुई जिससे उनका ह्रदय परिवर्तन हो गया. इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म को अपना लिया और भगवान बुद्ध के वचनों को शिलान्यास और शिलालेखों द्वारा प्रचार करना शुरु किया. सम्राट अशोक को बौद्ध धर्म में उपगुप्त नाम के भिक्षुक ने दीक्षा दी थी. अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार करने के लिए अपने कोषागार के पण को खाली कर दिया था. सम्राट अशोक ने देवानाप्रिय,प्रियदर्शी' जैसी उपाधि धारण की थी. भारत समेत एशिया के देशो में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया जैसे सीरिया,मिश्र,चीन,नेपाल था. युद्ध से मन उब जाने के बाद भी सम्राट अशोक के पास विशाल सेना थी ताकि कोई भी राजपाठ पर हमला ना कर दे और साम्रज्य के पतन को रोका जा सके. बौद्ध धर्म अपनाने के बाद भी किसी अन्य धर्म का पालन करने के छुट प्रदान थी जनता को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने की आजादी थी. सम्राट अशोक ने भारत को जोड़ने में मुख्य भूमिका निभाई थी. सम्राट अशोक के शासन काल में ईरान- अफगानिस्थान से भारत के निचले हिस्से के कुछ हिस्से को छोड़ कर बाकि सभी हिस्सों पर अशोक का शासन था. सम्राट अशोक ने लगभग (272 ई.पु.-236 ई.पु). तक शासन किया था. सम्राट अशोक के मृत्यु के पश्चात दशरथ मौर्य ने राजसिहासन ग्रहण किया था. मौर्य साम्राज्य का अंतिम सम्राट बृहद्रथ मौर्य था जिसे पुष्यमित्र सुंग ने हत्या कर दी थी. 

मौर्य साम्राज्य का पतन 

मौर्य साम्राज्य जो की 137 वर्षो तक राज किया किन्तु 185 ई.पु. तक मौर्य साम्राज्य का विघटन शुरू हो गया था. अशोक ने अपने सभी भाइयों की हत्या का दी थी जिससे राज्य सामंत दूसरों को बनाना पड़ा था परिणामस्वरुप अशोक के मृत्यु पश्चात सभी विद्रोह कर स्वतंत्र हो गये. अंतिम मौर्य सम्राट वृहद्रथ की हत्या उसके सेनापति पुष्यमित्र सुंग ने हत्या कर दी थी. इसके बाद मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया.   

मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण 

मौर्य साम्राज्य के पतन के प्रमुख कारण इस प्रकार से है-

  •   अयोग्य और निर्बल उतराधिकारी का होना 
  • प्रशासन का अत्यधिक केन्द्रीयकरण 
  • राष्ट्रिय चेतना का आभाव होना 
  • आर्थिक एवं सांस्कृतिक असमानता का होना
  • प्रान्तीय शासकों के अत्याचार 
  • अधिक कर वसूल करना
  • अशोक की धम्म निति 
  • अमन्यों के अत्याचार
  • धार्मिक निति 
  • राज परिवार का भोग विलास में पड़ जाना.
  • अन्य धर्मों का विरोध करना
सबसे बड़ा कारण था अशोक का बौद्ध धर्म अपनाना. बौद्ध धर्म अपनाने के बाद सम्राट अशोक ने धम्मविजय नीति कों मान्यता दी जिससे राज्य विस्तार के लिए कोई युद्ध नही लड़ा गया.धीरे-धीरे मौर्य साम्राज्य के शासन में सम्राट के पास वरिष्ट पदाधिकारियों पर नियंत्रित नही रख पाया और आर्थिक संकट भी बड़ने लगा था. क्योकि सम्राट अशोक ने अपना सारा राजकोस बौद्ध धर्म को बनाने में खली कर दिया जिससे राज्य खर्च बड़ने लगा.
 
मौर्य साम्राज्य की वंशावली(322 ई.पु.-185 ई.पु.
  1. सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई. पु.- 297 ई.पु.)
  2. सम्राट बिन्दुसार मौर्य (297 ई.पु.-273 ई.पु.)
  3. सम्राट अशोक मौर्य (268 ई.पु.-232 ई.पु.)
  4. सम्राट दशरथ मौर्य (232 ई.पु.-224 ई.पु.)
  5. सम्राट सम्प्रति मौर्य (224 ई.पु.-215 ई.पु.)
  6. सम्राट शालिसुक मौर्य (215 ई.पु.-202 ई.पु.) 
  7. सम्राट देववर्मन मौर्य (202 ई.पु.-195 ई.पु.)
  8. सम्राट शतधन्वन मौर्य (195 ई.पु.-187 ई.पु.)
  9. सम्राट बृहद्रथ मौर्य  (187 ई.पु.-185 ई. पु.)  

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