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मंगलवार, 6 फ़रवरी 2024

आंग्लो-मराठा युद्ध (1775 ई.-1818ई.)

आंग्लो-मराठा युद्ध (1775 ई.-1818ई.)

आंग्लो-मराठा युद्ध(1775-1782 ई.) 

आंग्ल-मराठा युद्ध अंग्रेजो और मराठो के बीच में  तीन बार हुआ था. तीनों युद्ध मराठा शासकों के आपसी झगड़े और अंग्रेजों के कुटील निति के कारण हुआ था. मराठा और अंग्रेजों के बीच हुए इस युद्ध से मराठा महासंघ का पूरी तरह से विनाश हो गया. क्योकि मराठों में उत्पन्न आपसी मतभेद उन्हें एकजुट होने नही दिया. रघुनाथ राव द्वारा पेशवा बनने की लालसा में अंग्रेजों से मित्रता की और सूरत की संधि की. इसके बाद मई 1782 ई. में सालबाई की सन्धि हुए जिसमें अंग्रेजों को बंबई के पास सालसेत द्वीप पर अपना कब्जे के रूप में स्थान प्राप्त हुई. बाजीराव द्वितीय ने पहली बसीन की संधि(1803-०६) की और दूसरा बसीन की संधि(1817-1818) की. इस प्रकार बाजीराव द्वितीय ने अपनी स्वतंत्रता अंग्रेजों को सौफ दी. इस युद्ध से मराठाओं का पतन हो गया और पतन का मुख्य कारण बाजीराव द्वितीय की कायरता और धोकेबाजी थी.

पहला आंग्ला-मराठा युद्ध

प्रथम आंग्ला-मराठा युद्ध 1775 ई.- 1782 ई. तक हुई थी. रघुनाथ राव द्वारा मराठा संघ की पेशवा की गद्दी प्राप्त करने की लालसा के कारण वह अंग्रेजों से मित्रत्ता कर ली और 1775 ई. में अंग्रेजों से सूरत की संधि की जिससे बंबई राज(अंग्रेज सरकार) उसे डेढ़ लाख मासिक खर्च पर 2500 सैनिक देगी. इसके बदले बंबई में स्थित सालसेत द्वीप और बसीन को देने का वचन दिया. इसके बाद 1778ई. में मराठों व अंग्रेजों के बीच हुए बड़गांव नामक स्थान पर अंग्रेजों की बुरी तरह से हर हो गया था. जिससे 1782 ई. में सलबाई की संधि करनी पड़ी. इस प्रकार प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध रघुनाथ राव के कारण हुआ था.

सालबाई सन्धि -

  1.  अंगेजों को राघव राव का साथ छोड़ने और रागोबा को 25000 रूपये की मासिक स्वीकार कर लिया.
  2. अंग्रेज ने सालसोठ और भडोस से अपना कब्ज़ा छोड़ दिया.
  3. अंगेजों ने माधव राव द्वितीय को पेशवा माना,
  4. और यमुना नदी के पश्चिम प्रदेश पर सिंधिया पर अधिकार कायम रहा. 
द्वितीय आंग्ला-मराठा युद्ध 

द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध 1803 ई.-1805 ई. तक हुआ. बाजीराव द्वितीय ने गद्दारी कर आत्मसमर्पण करने के बाद अंग्रेज होल्कर,भोंसले,महादजी शिन्दे को भी अधीन करने के लिए कूटनीति द्वारा मराठों में आपसी फुट व कलह को बढावा दिया. इस युद्ध के बाद मराठों और अंग्रेजों में तीन संधियाँ हुई जो इस प्रकार है-

  1. 1803 में भोंसले परिवार से देवगांव की संधि,
  2. 1803 में सिंधिया परिवार से सुर्जीअर्जनगाँव की संधि,
  3. 1805 में होल्कर परिवार से राजपुरघाट की संधि
तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध 1817-1818 ई. तक चला. यह युद्ध लार्ड होस्टिंग(१८१३ - १८२३ई.) के भारत अंग्रेजी भाग के गवर्नर-जनरल बनने के बाद लड़ा गया. यह मराठा का अंग्रेजों से अंतिम युद्ध था जिसके बाद उनका पतन हो गया. तृतीय आंग्ला-मराठा युद्ध के बाद कुछ सन्धिया हुई जो इस प्रकार है-

  1. अंग्रेजो ने पेशवा को 13 जून 1817 को 5 नवम्बर 1817 में दौलतदाव सिंधिया के साथ ग्वालियर की संधि की जिसमे महादजी शिन्दे पिंडारियों के दमन में  अंग्रेजों का साथ देना था.
  2. जून १८१७ में अंग्रेजों ने पूना की संधि की,जिसमे पेशवा को अपनी मराठा संघ की अध्यक्षता छोड़नी थी.

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